बुधवार, 18 अक्टूबर 2023

रजनी शर्मा 'बस्तरिया' की एक कविता

बस्तर 

बस्तर से  लौटने वाले
अपने भीतर समेटे 
दोनो में भात,
 पत्तों में हवा,
 तुमा में पानी.........
 जंगल उनके भीतर 
आज भी हरा है
 बस्तर जाने वालों
 से पूछते हैं कि
 अब कैसा है?
 बस्तर...............
 मैं कुछ बोलती नही,
 रख देती हूं।
 उनकी हथेलियों में,
 एक अंजुरी माटी ,
बूंद भर पानी.........
 हवा खुद ब खुद
 आ जाती है और
 हथेलियों से
 बस्तर
पहुंच जाता है 
उनके भीतर.............
 
• रजनी शर्मा 'बस्तरिया'

शनिवार, 14 अक्टूबर 2023

सुमित वाजपेयी'मध्यांदिन'की एक कविताए

चिकनी सतह पर ध्यान दो


आप्तालित मधुमास के, चौमासा से भींगे हुए

ये निलय हैमैं

मै कह रहा हूं,आप से चिकनी सतह पर ध्यान दो.


कोई प्रेम नहीं करता अंधेरे से

सघन बीती रात के,ओश से भींगे हुए

कुछ सत्य और असत्य है 

मैं कह रहा हूं आप से चिकनी सतह पर ध्यान दो.


टूटे हुए छप्पर के नीचे,टूटी हुई दीवाल मिट्टी की

उसी दरवाजे की चौखट पर बैठा एक बच्चा

का रहा है बात

रो रहा घर में है कोई,भूख के सूखे पड़े कुछ पत्र है

मै कह रहा हूं आप से चिकनी सतह पर ध्यान दो

                              °°°°

  
संपर्क: ग्राम -रजवापुर, पोस्ट -बरबटपुर जिला -सीतापुर