ग्रामीण भावबोध का साहित्यिक मंच
सघनता के बीच में
अँधेरा फैला है
अति बारीक महीन
उजला है आकाश अनन्त सा
नक्षत्र सो रहे है
नदी में ओढ़े नीला वर्ण
धरती सो रही है
पेड़ो पर सिर रख कर
अर्धरात्रि सघन है
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