बेबसी
सात समुंदर पार का
एक महुए का पेड़
जिसकी कुछ पत्तियां समुन्दर की लहरों में
बहके आती हैं इधर
मदरसे में बच्चों को देखता
मदरसे के बाहर कांच बीनता बच्चा
जिसके अरमान बहके जाते है
मास्साब के ब्लैक बोर्ड तक
उसी तरह
जिसकी आंखों में , कभी
झाँककर नही देखा
परसो तालाब में डूब रहा था एक बच्चा
कह रहा था, चीख रहा था
बचाओ-बचाओ
किसी ने नही बचाया
सब जानते थे कि वो झूठ बोल रहा था
मगर अब वो वास्तव में डूब
चुका था,हमने देखा था..
उसकी आँखों मे दम तोड़ता सपना
जो अपना नाम दिन में पांच बार लिखता
साफ़-साफ़ ज़मीन पर
क्योकि उसने अब तक अपना नाम
लिखना ही सीखा था
फिर कलम की जगह
पकड़ा दिया गया एक बोरिया
काँच बीनने के लिए
डूबता हुआ,मदरसे में झांकता हुआ
बहके मास्साब के ब्लैक बोर्ड तक जाने के लिए
हमेसा , अनवरत.....
-सुल्तान मोहित वाजपेयी
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