सोमवार, 19 फ़रवरी 2024

चीजों को देखने में बड़ा अंतर है

चीजों को देखने में बड़ा अंतर है 

यौवन में 
नहीं ठहर पाता प्रेम, 
कि प्रेम!  
फिसल कर 
धप्प से आ गिरता है बचपन की कोमल स्मृतियों में, 
शायद इसलिए कि - 
बहुत छुटपन के दिनों में 
किसी पोटली में 
विश्वास जैसी कोई चमकीली चीज़  
वहां... 
गुलमोहर के रंगों के बीच 
सुरक्षित बची रह गई होगी 

चीजों को निहारने में बड़ा अंतर है 
बचपन और यौवन में,  
कि प्यार! 
प्यार नहीं रहता ;  
अजनबीपन चक्कर कटाता है 
उम्र भर 
अन्जान राहों पर,  
जैसे -  
यौवन में प्रेम  
केवल परिकल्पनाओं में पनपता है  
और... 
कुछ ही क्षणों में 
ढह जाता है, 
कि ! 
नहीं छू पा सकती 
कोई बेल इसकी  
वास्तविकता का कोई छोर और जैसे... 
- एक दुष्ट छाया 
कोई धारदार हथियार लिए बैठी है 
बस प्रेम ही को कतरनें के लिए। 

               •रोज़लीन

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