शुक्रवार, 9 फ़रवरी 2024

कैलाश मनहर की एक कविता

वे इतने अच्छे हैं 
कि स्वयं को शिखर तक ले जाने के लिये 
वे हत्यायें भी करवा सकते हैं 
अपने ही साथियों की 
और देशभक्ति का मिथ्या राग रंभाते हुये
बेच सकते हैं समृद्ध देश के
तमाम संसाधन 

वे इतने वीर हैं 
कि क़ानूनन मिली सज़ा से 
बचने के लिये बार बार माफ़ी मांग सकते हैं 
और विवादास्पद ढाँचे को तोड़ने की 
हुँकार और इन्कार एक साथ 
कर सकते हैं 

वे इतने विद्वान हैं 
कि गोरखनाथ,रैदास और विवेकानन्द को 
एक धूणे का तपस्वी बता सकते हैं 
और मरते हुये रावण से सुशासन की विधि पूछने 
भरत को भेज सकते हैं और 
पाण्डवों का अस्त्रालय बता कर 
ऑस्ट्रेलिया को प्राचीन भारत का हिस्सा 
बता सकते हैं 

वे इतने सच्चे हैं 
कि अपनी सरकार बनते ही 
महंगाई कम करने और 
दो करोड़ युवाओं को नौकरी देने 
और गंगा को निर्मल न करने पर जल समाधि लेने 
और नोटबंदी से आतंकवाद की 
कमर टूटने के वायदों पर 
दृढ़ बने रहते हैं 

वे इतने त्यागी हैं कि 
घर-परिवार त्याग कर 
धर्मांधता फैलाने के लिये कटिबध्द रहते हुये 
सत्ता में आने के लिये सदैव संघर्षरत रह कर 
अन्तत: प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री पद सगर्व 
सुशोभित करते हैं 

वे इतने देशभक्त हैं 
कि देश के समस्त संसाधनों को 
बेचते हुये विकास के नाम पर 
धनिकों की तिज़ौरियाँ भरवाते हैं 
और देश के नागरिकों की हत्यायें 
भी करते हुये छप्पन इँची 
सीना फुलाये जाते हैं 

वे सर्वगुण सम्पन्न हैं 
दुष्ट छद्मी कि अधिकाँश देश और समाज 
बने हुये हैं उनके पिछलग्गू जबकि 
एक समूची सभ्यता मरती जा रही है बस
भ्रमित भावावेश में 
             •कैलाश मनहर 

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