मंगलवार, 3 अक्टूबर 2017

नयापन

नयापन उतरता है
मौन को मुखरित करके
जंगल के किसी पेड़ पर
या फिर लोमड़ी की खाल में

नयापन रुकता हैं
वातायन की पीठ पर
पलस्तर खुरची दीवार पर
अज्ञात आकृति बन जाने पर
या फिर अगूंठा का निशान सा

नयापन नया बनता है
कई तरह के पत्तो से
ओश और बरसात की बूंदों से
पुरानेपन की रौदकर
दूसरी फसल की तरह
पहली हराई के बाद जैसे मिट्टी फूटती है
      
                     -सुमित वाजपेयी 'मध्यान्दिन'

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