मंगलवार, 3 अक्टूबर 2017

इंतज़ार (दो)

तुम्हारी ढेर सारी बाते
और मेरा इंतज़ार
खुलता है.......
अंधरे में एक रोशन-दान की तरह
और इंतज़ार साये की तरह
लंबा होने लगता है
और मन में पिघलने लगती है-यादें
मोमबत्ती की तरह

तुम्हारे सारे ख़त.....जिसमे लिखा हैं
तुम्हारे प्यार
सुरक्षित है-तुम्हारा इंतज़ार

आआओगे तुम एक दिन ज़रूर।

                -सुमित वाजपेयी 'मध्यान्दिन'

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