धरती का रंग हरा
चाँद का ठंढा सफ़ेद
तारो का रंग आँख की चमक
एक रंग भाषित होता निर्वात में
दूसरा रंग दूसरी दुनियां में अमर
बदलो का रंग होता है इंद्र -धनुष पर रुक
रंग उतरते है सूरज से रथ से
फूलो पर.....
तितलियों के परो पर.....
दूब-घास बनकर
गेहूं में स्वाद बनकर
धान के कच्चे दाने में दुद्धा सा सफ़ेद
रंगो का फूलो से अनुबंध है
और सुगंध के साथ यारी
तभी तो रंग जीवन में
सात तरह से प्रवेश करते है
अपना-अपना भार लेकर
-सुमित वाजपेयी 'मध्यान्दिन'
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