ग्रामीण भावबोध का साहित्यिक मंच
मुसहर ईट पाथता है ईट पकाता है चूहा खाता है
बनिया ईट बेचता है मुनाफा कमाता है माल खाता है। -सुमित वाजपेयी 'मध्यान्दिन'
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