ज़ंज़ीरे
नयी बहू आज पहली बार ब्याहकर ससुराल आयी थी..,बहुत सारा दहेज लेकर,सोना- चांदी,और बहुत सारी नोटों की गड्डियां..
दिन भर नयी बहू को देखेंने आने की औपचारिकता चलती रही नाते-रिश्तेदार आये,पास-पड़ोसी आये... दिन कटा...
रात को दूल्हा जा ही पाया था नयी बहु के पास की बाहर से आवाज आयी-"अरे छुटके जरा यहाँ तो आ..!देख तो कितना-कुछ लायी है..!"
दूल्हा कमरे के बाहर चला गया..!नयी बहू उससे कुछ कहना चाह रही थी..शायद..नही कह पायी..!
एक घंटा हो गया,और अब दो घंटे..?अचानक नयी बहू को हार्ट अटैक का जबर्दरस्त दौरा पड़ा..? उसकी आखिरी सासे सुहागरात की सेज पर ही अनन्त की और चल रही थी..!
उसने कई बार आवाज़ दी,पास बुलाने का भरभस प्रयास किया वो नही आये..?सारे लोग एक साथ बैठे बेटे , भाई ,भतीजे ,ऒर भांजे की शादी का जश्न मना रहे थे..और दहेज में मिली गड्डियों की नोटे गिन रहे थे..!
दूल्हे ने बीच-बीच कहा भी -माँ वो बुला रही है ..!शायद उसकी तबियत...?
"बस थोड़ा रुक..ये आखिरी गड्डी है..!"माँ ने कहा..!
मगर तब तक उसकी आखिरी सांस भी जा चुकी थी..!!
बहुत सुंदर
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